मैं एक प्रशन का जवाब, दो दशक से तलाशने के बावजूद न पा सका. जब दुनिया के लगभग सभी देशों का नाम हर भाषा और लिपि में एक ही होता है तो फिर ऐसा हमारे देश के साथ क्यों नहीं...? हम हिंदी में "भारतीय" होते हैं और इंग्लिश में "इंडियन"....! ऐसा क्यों?
राजीव रावत एंकर-उत्त्रारखंड में पूर्व स्वीकूत ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाईन को मोदी सरकार के नए रेल बजट में बद्री-केदार रंेल लाईन के सर्वे की धोषणा के साथ नए नाम से मंजूरी दी है, जो लोग उत्तराख्ंांड का भुगोल नही जानते वो इसे चारधाम तक रेलनैटर्वक के रूप में देखंेंगे लेकिन देवभूमि को समझने वाला इस बात को जानता है कि पूरानी स्वीकृत कर्णप्रयाग रेल लाईन का मतलब बद्री-केदार ही है। इस लाईन का पहला सर्वे अग्रेजों ने किया था बाद में सतपाल महाराज के प्रयासों से पिछली कांग्रेस सरकार ने कर्णप्रयाग में इसका शिलान्यास भी किया लेकिन राज्य की तात्कालीन भाजपा सरकार नें भूमि हस्तान्तरण की प्रक्रिया पूरी नही की। शिलान्यास के बाद इस रेल लाईन पर इस बजट में निर्माण के लिए धन की उम्मीद थी लेकिन नए सर्वे की बात कहकर मोदी सरकार ने पूर्व स्वीकृति पर एक तरह से प्रश्न खड़ा कर उसे खारिज करने का संकेत दिया है। खैर रेल बजट से पहले उत्त्राखंड के सीएम ने हरीश रावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे पत्र में 11 नई रेल लाईन निर्माण की मांग की थी। इनमें से कुछ की स्वीकृति भी मिली हुई है जिनमें से ऋषिकेश-कर्णप्रयाग, टनक...
प्रतापनगर: महासैलाब दे गया कांग्रेस को संजीवनी RAJIV RAWAT · MONDAY, 17 OCTOBER 2016 17 reads जननायक की तरह उभरे MLA नेगी, CM बोले- थैंक्यू प्रतापनगर ----------------------------------------------------------------- 14 अक्टूबर 2016। टिहरी झील के पार प्रतापनगर के पहाड़ों में सुबह 9ः00 बजे से ही हर सड़क पर, हर घाटी-चोटी पर तिरंगे झंडे लगे वाहनों का रेला दिखायी देने लगा था, अक्सर मूक रहने वाले पहाड़ों में फिकवाल एकता जिंदाबाद-हरीश रावत जिंदाबाद, विक्रम नेगी जिंदाबाद के जयघोष सुनाई दे रहे थे। राजनीतिक विशलेषकों, पक्ष-विपक्ष के दूत और खबरनवीसों के दल भी पूरे घटनाक्रम पर नजरें टिकाये हुए थे कि आखिर फिकवाल समुदाय को ओबीसी और विकास कार्यो का लम्बा-चैड़ा पुलिंदा प्रतापनगर के विधायक विक्रम सिंह नेगी के साढ़े चार साल के कार्यकाल का परिणाम हर सत्ताधारी विधायक की तरह क्या एंटी इनकमबेन्सी का साबूत आज देने वाला है या फिर मेहनत रंग लायेगी। पड़िया मिनी स्टेडियम की ओर आने वाली सड़को पर कांग्रेसी झंडे वाली कार-जीप और छोटी-बड़ी बसों की कतारे देख कर राजनीतिक पंडितों के फोन घनसाली बाजार, चमियाला...
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